अनुराग दीक्षित/ दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। शहर को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार से करोड़ों रुपये का बजट मिला था। इसमें 32 सड़कों को चिन्हित कर उन्हें स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत विकसित करना था। इनमें मालगोदाम, नगर निगम, नेपियर टाउन, गोल बाजार, राइट टाउन सहित विजयनगर क्षेत्र की मुख्य सड़कें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में करीब 32 सड़कों को स्मार्ट बनाकर इन पर पैदल चलने के लिए फुटपाथ बनाए गए हैं। लेकिन इन फुटपाथों पर लोगों द्वारा कब्जा करके व्यवसाय किए जा रहे हैं।
करोड़ों खर्च करके बनाए गए हैं ये फुटपाथ
इन 32 सड़कों दोनों तरफ बनाए गए इन फुटपाथ के निर्माण में 100 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की गई है। इन फुटपाथों के निर्माण का मकसद यह भी था कि लोगों का पैदल आवागमन सुरक्षित रहे, लेकिन वर्तमान में इन फुटपाथों का उपयोग कई अवैध कब्जे करके व्यवसाय करने वाले लोग कर रहे हैं। नगर निगम से मानस भवन से स्टेडियम के चारों तरफ, जिसमें स्मार्ट सिटी का ऑफिस है, इस सड़क के फुटपाथ को तो ऑटो मैकेनिक और कार बाजार लगाने वालों ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। स्मार्ट सिटी के कार्यालय के नाक के नीचे हो रहे इस अतिक्रमण पर नगर निगम अधिकारियों की अनदेखी समझ के पार है।
सिविक सेंटर, गोल बाजार में लगी कब्जे की होड़
सिविक सेंटर और गोल बाजार में फुटपाथ पर कब्जा करने को लेकर अतिक्रमणकारियों के बीच होड़ सी मची हुई है। इन दोनों क्षेत्रों में जहां पहले से ही चाट, फुलकी एवं चाइनीज के ठेले वालों ने कब्जा किया है, वहीं रोज कुछ नए लोग भी अपने ठेले खड़े कर इन फुटपाथों पर अपना कब्जा जमा रहे हैं। यही नजारा गोल बाजार में भी देखने मिल रहा है। यहां पर भी पुराने कब्जों के अलावा रोज नए-नए कब्जे हो रहे हैं। गोल बाजार एवं सिविक सेंटर में बने इन फुटपाथों पर आस-पास के लोग सुबह-शाम टहलने आते हैं, अब उन्हें सड़क पर ही टहलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का भी अंदेशा बना रहता है। गोल बाजार में तो चारों ओर चबूतरे बनाकर बैठने के लिए सुंदर व्यवस्थाएं भी की गई हैं, लेकिन अब अतिक्रमण के चलते यहां लोग बैठने से भी कतराते हैं।
नगर निगम अतिक्रमण विभाग गहरी नींद में
इन फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए लगता है नगर निगम अतिक्रमण विभाग भी गहरी नींद में सोया हुआ है। यदि शिकायतों की संख्या अधिक हुई, तो अतिक्रमण अमला केवल खाना-पूर्ति करने के लिए वहां कब्जे हटाने पहुंच जाता है। सूत्रों के मुताबिक, इन अवैध कब्जाधारियों द्वारा नगर निगम अतिक्रमण विभाग को एक मोटी रकम रिश्वत में दी जाती है।
