भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन: भारत में सस्ती होंगी ब्रिटिश व्हिस्की, कारें और फैशन प्रोडक्ट्स

दैनिक सांध्य बन्धु नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 24 जुलाई को साइन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस डील के तहत भारत के 99% उत्पादों को यूके में जीरो टैरिफ पर निर्यात की अनुमति मिलेगी, जबकि यूके से आयातित 99% उत्पादों पर भारत में औसतन 3% टैरिफ लगेगा। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

इस समझौते के लागू होते ही भारत में ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की, लग्जरी कारें, फैशन प्रोडक्ट्स, मेडिकल डिवाइस और फूड आइटम्स की कीमतें गिरेंगी। स्कॉच व्हिस्की पर भारत में अब तक 150% आयात शुल्क लगता था, जो इस समझौते के तहत चरणबद्ध तरीके से घटाकर 40% कर दिया जाएगा। इसी तरह जगुआर और रोल्स-रॉयस जैसी ब्रिटिश कारों पर 100% शुल्क की जगह कोटा सिस्टम के तहत यह 10% तक आ जाएगा, जिससे इन कारों की कीमतों में 20-30% तक गिरावट आ सकती है। वहीं, UK से आने वाले चॉकलेट, बिस्किट, सौंदर्य प्रसाधन, होम डेकोर, कपड़े और फुटवियर जैसे सामान भी अब सस्ते मिल सकेंगे।

इस समझौते से भारत के कपड़ा, ज्वेलरी, चमड़ा, इंजीनियरिंग, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, मसाले और समुद्री उत्पाद जैसे निर्यात क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा। ब्रिटेन में अब भारतीय चादरें, परदे और होम टेक्सटाइल्स बिना किसी टैक्स के बिक सकेंगी, जिससे तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे हब्स को 40% तक ग्रोथ की उम्मीद है। वहीं, बासमती चावल, चाय, झींगे और मसालों पर भी ब्रिटेन में टैक्स हटने से असम, गुजरात, केरल और बंगाल की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को नई रफ्तार मिलेगी।

इस FTA से भारत की अर्थव्यवस्था को कई स्तरों पर फायदा मिलेगा। एक ओर जहां निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी, वहीं 6 करोड़ MSME को वैश्विक बाजार तक पहुंच और बेहतर मार्जिन मिलेगा। इसके साथ ही रोजगार में वृद्धि, ग्रीन एनर्जी में निवेश, और UK के रास्ते यूरोप में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावनाएं प्रबल हैं। भारत का अनुमान है कि इस समझौते से वह 2030 तक सिर्फ UK को 29 बिलियन डॉलर का निर्यात करेगा, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार 15% सालाना की दर से बढ़ेगा।

हालांकि यह समझौता साइन हो चुका है, लेकिन इसे लागू होने में एक साल तक का वक्त लग सकता है। भारत की कैबिनेट इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है, अब UK की संसद से स्वीकृति मिलनी बाकी है। गौरतलब है कि भारत और यूके के बीच इस FTA पर बातचीत जनवरी 2022 में शुरू हुई थी और 3.5 साल बाद यह डील फाइनल हुई है। इससे पहले भारत UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA जैसे देशों के साथ भी इसी तरह के समझौते कर चुका है और अब यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ भी वार्ता कर रहा है।

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