दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश कृषि विपणन बोर्ड द्वारा कर्मचारियों को नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में शामिल किए बिना रिटायर करने की गंभीर लापरवाही पर बड़ा आदेश सुनाया है। शहाना खान समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह गैरकानूनी और कर्मचारियों के अधिकारों के खिलाफ है।
अदालत में यह तथ्य सामने आया कि जनवरी 2005 के बाद नियमित सेवा में आए कर्मचारियों का NPS खाता कभी खोला ही नहीं गया। बोर्ड ने कर्मचारियों और नियोक्ता के अंशदान की रकम PFRDA को नहीं भेजी और अपने पास रखकर केवल मनमाना ब्याज जोड़कर लौटाया। रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को करीब 14.70 लाख रुपये बकाया चुकाए गए, लेकिन NPS का लाभ नहीं मिला।
जस्टिस विवेक जैन ने कहा कि यह प्रणाली पूरी तरह अवैध है और हजारों कर्मचारियों को धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा। हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन के पेंशन और प्रॉविडेंट फंड डायरेक्टर को जांच का आदेश दिया है। जांच में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कर्मचारियों को समय पर NPS में शामिल किया गया होता तो उन्हें कितना लाभ मिलता, नियोक्ता का योगदान सही था या नहीं, और उन्हें उतना रिटर्न मिला या नहीं जितना PFRDA देता।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को आदेश की प्रति 15 दिन में सौंपने और PF डायरेक्टर को 30 दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट 7 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट में पेश करनी होगी। समय पर न देने पर वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।
