Jabalpur News: रैपुरा स्थित ठाकुर फार्म में घोड़ों की मौत, संचालक और हैदराबाद की कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। पनागर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रैपुरा में स्थित ठाकुर फार्म में घोड़ों की लगातार हो रही मौत के मामले में डॉ. हेमलता जैन द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस ने फार्म संचालक सचिन तिवारी और हैदराबाद की कंपनी हेथा नेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

एफआईआर के अनुसार, कंपनी और संचालक पर पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(घ), 11(1)(ह) एवं भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 325 के तहत अपराध दर्ज हुआ है।

शिकायत में उल्लेख है कि 29 अप्रैल से 3 मई 2025 के बीच हैदराबाद से 57 घोड़ों को ट्रकों के माध्यम से सड़क मार्ग से जबलपुर लाया गया। इन घोड़ों को ग्राम रैपुरा स्थित ठाकुर फार्म में रखा गया, जिसकी जानकारी न तो जिला प्रशासन और न ही पशुपालन विभाग को दी गई। इतना ही नहीं, ग्राम पंचायत रैपुरा से भी अनुमति नहीं ली गई।

पशुपालन विभाग की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि इन घोड़ों को जिस फार्म में रखा गया था, वह कैटल शेड था, जो कि गाय-भैंस जैसे पशुओं के लिए बनाया गया था। घोड़ों के लिए आवश्यक सुविधाएं जैसे उचित स्पेस, वेंटिलेशन, स्वच्छता, टीकाकरण और चिकित्सीय देखभाल वहां उपलब्ध नहीं थी। नतीजतन, परिवहन के दौरान हुए हीट स्ट्रेस, क्लाइमेट चेंज और ट्रांसपोर्ट स्ट्रेस के चलते घोड़े लगातार बीमार होते गए और एक के बाद एक उनकी मौत होने लगी।

जांच में यह भी सामने आया कि अब तक 57 घोड़ों में से 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है। मृत घोड़ों में कई में तेज बुखार, कमजोरी, घावों में संक्रमण, नाक से खून बहना, खाना न खाना, चलने में असमर्थता जैसी गंभीर स्थितियां पाई गईं। कई घोड़े लंबे समय तक जमीन पर लेटे रहने से बेड सोर्स का शिकार हो गए थे।

पशुपालन विभाग भोपाल से पहुंचे अधिकारियों ने निरीक्षण में स्पष्ट किया कि ठाकुर फार्म में घोड़ों के लिए आवश्यक मानकों का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि फार्म में घोड़ों के रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और इससे यह साबित होता है कि पशुओं को अनावश्यक पीड़ा और यातना दी गई।

एफआईआर में दर्ज है कि परिवहन से पूर्व प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई और न ही स्वास्थ्य प्रमाण पत्र संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। पूछताछ में सचिन तिवारी ने माना कि परिवहन के दौरान घोड़ों पर पड़ने वाले तनाव और जलवायु परिवर्तन ही उनकी मौत का कारण बने।

पुलिस ने शिकायत पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। जांच अधिकारी के रूप में सहायक उप निरीक्षक रवि सिंह परिहार को नियुक्त किया गया है।

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