दिल्ली ब्लास्ट का एमपी कनेक्शन: महू से जुड़ा अल फलाह यूनिवर्सिटी का चेयरमैन, जांच में खुलासा

दैनिक सांध्य बन्धु इंदौर/महू (एजेंसी)। दिल्ली में हुए धमाके की जांच अब मध्य प्रदेश के महू तक पहुंच गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि ब्लास्ट का मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी, फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर था — और इस यूनिवर्सिटी का चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से महू (जिला इंदौर) का रहने वाला है।

इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाला डॉ. उमर नबी अपनी i-20 कार में विस्फोटक के साथ खुद को उड़ा चुका है, जबकि साथी प्रोफेसर डॉ. मुजम्मिल शकील को विस्फोटक जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों के साथ एक और नाम शाहीन सईद का भी जुड़ा है, जो इसी यूनिवर्सिटी में कार्यरत थी।

अल फलाह ट्रस्ट से शुरू हुई कहानी

फरीदाबाद की यह यूनिवर्सिटी अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाई जाती है, जिसे महू निवासी जवाद अहमद सिद्दीकी ने स्थापित किया था। शुरुआती दौर में उन्होंने अल फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज की नींव रखी, जो बाद में विश्वविद्यालय में बदल गया।

सूत्रों के मुताबिक, जवाद ने पहले अल फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी के नाम से कारोबार शुरू किया था और मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया। 2001 में आर्थिक गड़बड़ी सामने आने के बाद वह परिवार सहित दिल्ली चला गया और वहीं से यूनिवर्सिटी की शुरुआत की।

 “ड्यूटी के अलावा कोई संबंध नहीं”

मामले के बढ़ने के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. भूपिंदर कौर आनंद ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा हमारे दो डॉक्टर हिरासत में हैं, पर यूनिवर्सिटी का उनसे ड्यूटी के अलावा कोई संबंध नहीं। संस्थान में किसी भी तरह का रासायनिक या विस्फोटक पदार्थ नहीं रखा गया। हमारी सभी लैब सिर्फ मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए हैं। हर काम कानून के अनुसार किया जाता है।

महू में खाली मकान, जांच में जुटी पुलिस

महू के कायस्थ मोहल्ले में जवाद के परिवार का चार मंजिला मकान अब सूना पड़ा है, मुख्य गेट पर ताला लगा है।एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी ने बताया जवाद और उसके परिवार के पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जवाद का परिवार करीब 25 साल पहले महू छोड़ गया था। उसके पिता मोहम्मद हम्माद सिद्दीकी यहां के शहर काजी रह चुके हैं। सौतेला भाई अफाम हत्या के मामले में जेल जा चुका है।

मकान के बारे में बताया गया कि उसमें 25 से ज्यादा खिड़कियां और एक बड़ा तलघर है। स्थानीय लोग इसे ‘मौलाना की बिल्डिंग’ के नाम से जानते हैं। यह संपत्ति जवाद के पिता के नाम पर है, जिनका निधन 1995 में हो गया था।

पुलिस और खुफिया विभाग की सतर्कता

आईजी अनुराग सिंह (ग्रामीण) ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मीडिया के जरिए मिली है और अब आधिकारिक जांच शुरू की जा चुकी है। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि क्या जवाद या उसके ट्रस्ट के किसी नेटवर्क का संबंध दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा हुआ है।

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