दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) की कथित भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जबलपुर के कर्मचारियों और वैज्ञानिकों ने सोमवार को एक दिवसीय कलमबंद हड़ताल कर विरोध दर्ज कराया। यह आंदोलन ‘फोरम ऑफ केवीके एंड केवीके एम्प्लॉय वेलफेयर एसोसिएशन, मप्र’ के बैनर तले आयोजित किया गया।
कर्मचारियों ने ‘वन नेशन वन केवीके’ नीति लागू करने के साथ ही आरएस परोदा कमेटी की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग रखी। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने बताया कि संगठन की नौ सूत्रीय मांगों को लेकर यह हड़ताल की गई, जिनमें वेतन व भत्तों की बहाली प्रमुख है।
डॉ. सिंह के अनुसार, देशभर में 780 केवीके केंद्र आईसीएआर के वित्तपोषण से संचालित होते हैं, जिनमें से 44 मध्य प्रदेश में हैं। इनमें से कुछ कृषि विश्वविद्यालयों या महाविद्यालयों से संबद्ध हैं, जबकि कुछ सीधे आईसीएआर के अधीन आते हैं। उन्होंने कहा कि सीधे आईसीएआर से जुड़े केंद्रों के कर्मचारियों को सभी सुविधाएं मिलती हैं, जबकि विश्वविद्यालयों से संबद्ध केवीके कर्मचारियों को समय पर वेतन, भत्ते, पेंशन, ग्रेच्युटी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा, होस्ट संस्थानों द्वारा पदोन्नति देने पर आईसीएआर द्वारा वेतन रोक लेने की प्रथा समाप्त करने की भी मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 का उल्लंघन है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 30 नवंबर तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो 30 नवंबर के बाद अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू की जाएगी।