दैनिक सांध्य बन्धु भोपाल। मध्यप्रदेश में छह महीने पहले भाजपा नेता मनोहरलाल धाकड़ का बताकर वायरल हुआ अश्लील वीडियो विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अनूपपुर जिले में एक और मामला सामने आया। इस बार एबीवीपी से जुड़े युवा नेता आयुष राय का बताकर खुले मैदान में अश्लील हरकत करते हुए एक वीडियो वायरल किया गया।
अब साइबर फोरेंसिक जांच में इस वीडियो को फेक और एडिटेड घोषित किया गया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
20 अगस्त को एबीवीपी जिला संयोजक आयुष राय ने अमरकंटक थाने में शिकायत की थी कि कुछ स्थानीय युवकों ने अपने वेब पोर्टल, यूट्यूब चैनल और फेसबुक अकाउंट से उनका बताकर वीडियो अपलोड किया।
वीडियो में उन्हें खुले में “अश्लील हरकत” करते दिखाया गया था।
फेसबुक पर पोस्ट डालते हुए एक युवक रामबाबू चौबे ने लिखा—
“श्रीराम के नाम गमछा बिछाकर अवैध कृत्य किया जा रहा है। हिंदू समाज को आहत किया जा रहा है।”
इसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हुआ।
राजनीतिक दुश्मनी का आरोप
आयुष राय ने पुलिस से कहा कि वे एबीवीपी के जिला संयोजक हैं और राजनीतिक गुटबाजी के कारण उनके विरोधी उनसे नाराज रहते हैं।
उन्होंने दावा किया कि—
“राजनीतिक दुश्मनी निकालने के लिए फर्जी वीडियो बनाया गया। फोन पर चेतावनी देने के बाद भी इसे सोशल मीडिया पर डाला गया।”
साइबर फोरेंसिक अधिकारी कुलदीप वर्मा ने जांच में पाया कि वीडियो काफी धुंधला था, इसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी, वीडियो एडिटेड है यह डीपफेक भी हो सकता है। अंततः रिपोर्ट ने साफ किया कि वीडियो में दिखाया गया व्यक्ति आयुष राय होने का कोई सबूत नहीं है।
आयुष बोले— 'छवि खराब, परिवार को आघात'
आयुष ने कहा—“मैं पत्रकारिता का विद्यार्थी हूं, पीजी कर रहा हूं। इस वीडियो ने मेरी पढ़ाई पर असर डाला, परिवार की सामाजिक छवि खराब हुई। ऐसे फेक वीडियो की वजह से कई लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। यह मानसिक यातना है।”
भारत में डीपफेक पर कड़े नियम लागू
हालांकि डीपफेक के लिए अभी अलग से कोई कानून नहीं है, लेकिन— आईटी एक्ट, मानहानि और अश्लीलता की धाराएं, निजता उल्लंघन, धोखाधड़ी जैसे प्रावधान इन मामलों पर लागू होते हैं।
इसके अलावा IT Rules 2021 में 2025 का संशोधन 15 नवंबर 2025 से प्रभावी हुआ है, जो डीपफेक कंटेंट पर सख्त कार्रवाई, लेबलिंग और त्वरित हटाने को अनिवार्य करता है।
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