दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) नई दिल्ली। सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। 20 जनवरी को लगातार दूसरे दिन दोनों कीमती धातुएं ऑलटाइम हाई पर पहुंच गईं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक एक किलो चांदी पहली बार ₹3 लाख का आंकड़ा पार करते हुए ₹3,09,345 पर पहुंच गई। एक ही दिन में चांदी ₹15,370 महंगी हुई है। इससे पहले सोमवार को इसका भाव ₹2,93,975 था। MCX पर चांदी पहले ही ₹3 लाख के पार निकल चुकी है।
साल की शुरुआत के महज 20 दिनों में ही चांदी की कीमत ₹78,925 बढ़ चुकी है, जिसने निवेशकों और कारोबारियों को चौंका दिया है। वहीं सोने की कीमत भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। 24 कैरेट सोना ₹3,463 की तेजी के साथ ₹1,47,409 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो सोमवार को ₹1,43,946 था। इस साल अब तक सोना ₹14,214 महंगा हो चुका है।
पिछले साल यानी 2025 में भी कीमती धातुओं ने जबरदस्त रिटर्न दिया। 31 दिसंबर 2024 को ₹76,162 प्रति 10 ग्राम रहा सोना 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹1,33,195 पहुंच गया, यानी करीब 75% की बढ़त। वहीं चांदी ने निवेशकों को और भी बड़ा फायदा दिया। ₹86,017 प्रति किलो से बढ़कर ₹2,30,420 प्रति किलो तक पहुंचते हुए इसमें करीब 167% की तेजी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी में आई इस ऐतिहासिक तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में भारी इस्तेमाल के चलते चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक अहम इंडस्ट्रियल मेटल बन चुकी है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ बढ़ोतरी की आशंका के चलते वहां की कंपनियां चांदी का बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी उत्पादन रुकने के डर से पहले से खरीदारी की होड़ मची हुई है।
बाजार जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में चांदी की चमक और तेज हो सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार 2026 में चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है। सैमको सिक्योरिटीज ने मजबूत तकनीकी संकेतों के आधार पर ₹3.94 लाख प्रति किलो तक का अनुमान जताया है। कुछ ग्लोबल एक्सपर्ट्स तो इसे $100 से $200 प्रति औंस तक जाता देख रहे हैं, जो भारतीय बाजार में ₹3.5 से ₹4 लाख प्रति किलो के आसपास बैठता है।
वहीं सोने में तेजी की वजह डॉलर की कमजोरी, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी मानी जा रही है। अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे सोना सस्ता निवेश विकल्प बन गया। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच निवेशक सोने को सुरक्षित ठिकाने के तौर पर चुन रहे हैं। इसके अलावा चीन समेत कई देश अपने रिजर्व बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं, जिससे कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।
कुल मिलाकर सर्राफा बाजार में तेजी का यह दौर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि आने वाले महीनों में सोना-चांदी और कितनी नई ऊंचाइयों को छूते हैं।
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