दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मदन महल पहाड़ी पर स्थित जबलपुर की ऐतिहासिक पहचान बैलेंसिंग रॉक को लेकर एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। इस वीडियो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इस प्राकृतिक धरोहर को गिरते हुए दिखाया गया, जिससे शहरवासियों में चिंता और आक्रोश फैल गया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
AI तकनीक से बनाया गया भ्रामक वीडियो
AI तकनीक जहां एक ओर लोगों के जीवन को आसान और तेज बना रही है, वहीं इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में मदन महल की पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध बैलेंसिंग रॉक को गिरते हुए दिखाया गया। यह वीडियो पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया जा रहा है।
इससे पहले भी जबलपुर रेलवे स्टेशन पर हवाई जहाज की लैंडिंग का AI से बनाया गया वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद वीडियो बनाने वाले व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। अब बैलेंसिंग रॉक को लेकर बनाया गया यह वीडियो लोगों के बीच भ्रम और डर फैलाने का कारण बना है।
बैलेंसिंग रॉक जबलपुर की ऐतिहासिक पहचान
बैलेंसिंग रॉक जबलपुर की ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह संरचना वर्षों से स्थानीय लोगों के लिए गर्व का प्रतीक रही है और बड़ी संख्या में पर्यटक इसे देखने आते हैं। वीडियो में इस धरोहर को गिरते हुए दिखाना न केवल भ्रामक है, बल्कि शहर की छवि पर भी डिजिटल हमला माना जा रहा है।
वीडियो वायरल होते ही कई लोगों ने इसे सच मान लिया और सोशल मीडिया पर चिंता व्यक्त करने लगे।
पुलिस ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
जबलपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि यह वीडियो पुलिस के संज्ञान में आ चुका है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इंस्टाग्राम पेज “APANA JABALPURAM – MP 20” द्वारा यह वीडियो पोस्ट किया गया था।
ASP ने कहा कि इस प्रकार का वीडियो बनाकर और प्रसारित कर लोगों में भय और भ्रम फैलाना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि मामले को तत्काल गढ़ा थाना प्रभारी को सौंप दिया गया है और संबंधित पेज संचालक के खिलाफ गिरफ्तारी सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
24 घंटे सोशल मीडिया पर नजर
पुलिस प्रशासन के अनुसार, सोशल मीडिया पर अफवाह और भ्रामक सामग्री पर नजर रखने के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग टीम 24 घंटे काम कर रही है। यह टीम इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर वायरल होने वाली संदिग्ध पोस्ट को ट्रैक करती है।
पुलिस ने बताया कि अफवाह फैलाने, अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने या लोगों में डर पैदा करने वाले कंटेंट बनाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
अफवाह फैलाना पड़ेगा भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक का दुरुपयोग समाज में भ्रम और अस्थिरता पैदा कर सकता है। ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े फर्जी वीडियो लोगों की भावनाओं को प्रभावित करते हैं और प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और अफवाह फैलाने से बचें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
AI तकनीक से बनाया गया भ्रामक वीडियो
AI तकनीक जहां एक ओर लोगों के जीवन को आसान और तेज बना रही है, वहीं इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में मदन महल की पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध बैलेंसिंग रॉक को गिरते हुए दिखाया गया। यह वीडियो पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया जा रहा है।
इससे पहले भी जबलपुर रेलवे स्टेशन पर हवाई जहाज की लैंडिंग का AI से बनाया गया वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद वीडियो बनाने वाले व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। अब बैलेंसिंग रॉक को लेकर बनाया गया यह वीडियो लोगों के बीच भ्रम और डर फैलाने का कारण बना है।
बैलेंसिंग रॉक जबलपुर की ऐतिहासिक पहचान
बैलेंसिंग रॉक जबलपुर की ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह संरचना वर्षों से स्थानीय लोगों के लिए गर्व का प्रतीक रही है और बड़ी संख्या में पर्यटक इसे देखने आते हैं। वीडियो में इस धरोहर को गिरते हुए दिखाना न केवल भ्रामक है, बल्कि शहर की छवि पर भी डिजिटल हमला माना जा रहा है।
वीडियो वायरल होते ही कई लोगों ने इसे सच मान लिया और सोशल मीडिया पर चिंता व्यक्त करने लगे।
पुलिस ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
जबलपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि यह वीडियो पुलिस के संज्ञान में आ चुका है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इंस्टाग्राम पेज “APANA JABALPURAM – MP 20” द्वारा यह वीडियो पोस्ट किया गया था।
ASP ने कहा कि इस प्रकार का वीडियो बनाकर और प्रसारित कर लोगों में भय और भ्रम फैलाना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि मामले को तत्काल गढ़ा थाना प्रभारी को सौंप दिया गया है और संबंधित पेज संचालक के खिलाफ गिरफ्तारी सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
24 घंटे सोशल मीडिया पर नजर
पुलिस प्रशासन के अनुसार, सोशल मीडिया पर अफवाह और भ्रामक सामग्री पर नजर रखने के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग टीम 24 घंटे काम कर रही है। यह टीम इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर वायरल होने वाली संदिग्ध पोस्ट को ट्रैक करती है।
पुलिस ने बताया कि अफवाह फैलाने, अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने या लोगों में डर पैदा करने वाले कंटेंट बनाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
अफवाह फैलाना पड़ेगा भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक का दुरुपयोग समाज में भ्रम और अस्थिरता पैदा कर सकता है। ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े फर्जी वीडियो लोगों की भावनाओं को प्रभावित करते हैं और प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और अफवाह फैलाने से बचें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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