दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनीं निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और बीना विधायक निर्मला सप्रे से अलग-अलग चर्चा की। यह मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के पास विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ शामिल हैं, पहले सुनवाई कर चुकी है। राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया था कि दलबदल का मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है और उस पर सक्रिय रूप से विचार चल रहा है।
हाईकोर्ट ने 15 जनवरी को सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया। साथ ही, सरकार की स्थगन याचिका स्वीकार कर ली गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को तय की गई है।
विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि हाईकोर्ट ने सरकार और विधानसभा से कार्रवाई के बारे में पूछा था। विधानसभा की ओर से जवाब दिया गया कि मामले में प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय लेना होता है।
सिंघार ने आरोप लगाया कि विधायक निर्मला सप्रे ने मंच पर भाजपा की सदस्यता ली थी और इसके प्रमाण कांग्रेस ने स्पीकर को सौंप दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष अगले 8 से 15 दिनों के भीतर फैसला ले सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा उप चुनाव से बचना चाहती है। उनका दावा है कि यदि बीना में उपचुनाव होते हैं, तो कांग्रेस की जीत तय है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया लेने के लिए विधायक निर्मला सप्रे से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया।
अब इस मामले में सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले और 27 फरवरी को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है।
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