दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। पुलिस ने आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर की गई बड़ी ऑनलाइन ठगी के मामले में कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस प्रकरण में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। विवेचना के दौरान आरोपियों की पतासाजी करते हुए पुलिस टीम ने कानपुर और लखनऊ में दबिश देकर उन्हें अभिरक्षा में लिया।
पीड़ित से ऐसे की गई ठगी
दिनांक 28-11-2025 को अनिल कुमार नन्हौरया (उम्र 72 वर्ष), निवासी संजीवनी नगर, जबलपुर ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 22-11-2025 को सुबह लगभग 10:30 बजे उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम से अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से जारी सिम का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट दिल्ली थाने में दर्ज है।
इसके बाद उन्हें दिल्ली थाने से बात कराने के बहाने एक अन्य नंबर दिया गया। कॉल करने पर कथित आईपीएस अधिकारी विजय कुमार से बातचीत हुई, जिसने वीडियो कॉल कर खुद को आईपीएस बताया और व्हाट्सएप पर केस नंबर 430/2025 दिल्ली पुलिस का फर्जी विवरण भेजा।
सीबीआई केस का डर दिखाकर किया मानसिक दबाव
दोपहर 1:23 बजे दोबारा वीडियो कॉल कर कथित विजय कुमार ने बताया कि आप सीबीआई में दर्ज सदाकत खान ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में संदिग्ध हैं। आरोपी ने यह भी कहा कि सदाकत खान के पास पीड़ित के नाम का एटीएम कार्ड मिला है, जो केनरा बैंक मुंबई का है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का फर्जी पत्र और केस से जुड़े दस्तावेज व्हाट्सएप पर भेजे गए। आरोपी ने इसे “सीक्रेट मिशन” बताते हुए पीड़ित को किसी से भी बात न करने की धमकी दी और हर तीन घंटे में लोकेशन व गतिविधि की जानकारी भेजने को कहा।
गिरफ्तारी और जब्ती का भय दिखाकर करवाई रकम ट्रांसफर
23-11-2025 को पीड़ित को बताया गया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट और जब्ती के आदेश जारी हो गए हैं। राहत के नाम पर “प्रायोरिटी इन्वेस्टिगेशन” का झांसा दिया गया और कथित सीबीआई अधिकारी कीर्ति सान्याल से अनुमति दिलाने की बात कही गई।
24-11-2025 को कहा गया कि अपने सभी डिपॉजिट (फिक्स्ड डिपॉजिट सहित) तुड़वाकर सुप्रीम कोर्ट के खाते में जमा करें, जहां वेरिफिकेशन के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद पीड़ित ने अपनी एफडी तुड़वाकर एसबीआई कमला नेहरू नगर शाखा, जबलपुर के खाते में रकम जमा की और वहां से 76 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से कथित सुप्रीम कोर्ट खाते के नाम पर आईसीआईसीआई बैंक वृंदावन योजना शाखा में “शुभ प्रभवे इफ्रा प्राइवेट लिमिटेड” के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। बाद में उन्हें फर्जी रसीद भेजी गई।
पीड़ित की शिकायत पर थाना अपराध जबलपुर में कथित आईपीएस विजय कुमार और कथित सीबीआई अधिकारी कीर्ति सान्याल के विरुद्ध धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 66-डी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
अजय वर्मा से पूछताछ में बड़ा खुलासा
विवेचना के दौरान अजय वर्मा (35 वर्ष), निवासी वृंदावन कॉलोनी रायबरेली रोड, लखनऊ को अभिरक्षा में लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि उसने करीब तीन साल पहले शुभ प्रभवे इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के नाम से आईसीआईसीआई बैंक में खाता खुलवाया था। करीब एक साल से खाते में कोई लेन-देन नहीं हुआ था।
उसकी पहचान वेदप्रकाश वर्मा से थी, जिसने कहा कि खाते में पैसा आएगा और परसेंट मिलेगा। इसके बाद अजय, वेदप्रकाश और शाहरुख लखनऊ से दिल्ली गए, जहां कृष्णा और विकास नामक व्यक्तियों से मुलाकात हुई। वहीं खाते की यूजर आईडी और पासवर्ड साझा किए गए।
24-11-2025 को गोलू निवासी अलीगंज, लखनऊ ने फोन कर इंद्रानगर स्थित होटल “द स्टे” में बुलाया। वहीं गोलू ने अजय का मोबाइल ले लिया। बाद में अजय के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में 1,00,700 रुपये आए, जिसे उसने निकालकर खर्च कर दिया।
वेदप्रकाश वर्मा (37 वर्ष), निवासी कानपुर रोड एलडीए कॉलोनी, लखनऊ ने बताया कि उसके रिश्तेदार संजय सोनी ने दिल्ली के लोगों से संबंध होने की बात कही थी, जो खातों के जरिए पैसा ट्रांसफर कराते हैं और कमीशन देते हैं। इसी के चलते उसने अजय वर्मा से खाता उपलब्ध कराने की बात की और उसे दिल्ली ले जाकर कृष्णा और विकास से मिलवाया।
24-11-2025 को गोलू का फोन आया और उसे होटल “द स्टे” बुलाया गया, जहां अजय का मोबाइल गोलू ने ले लिया। उसे नहीं पता कि गोलू ने मोबाइल से किस खाते में क्या ट्रांजेक्शन किया।
कानपुर और लखनऊ से दो और आरोपी गिरफ्तार
पतासाजी करते हुए पुलिस ने कानपुर (उ.प्र.) में दबिश देकर अंकित सिंह (36 वर्ष), निवासी कानपुर को तथा लखनऊ में दबिश देकर विशाल सिंह चौहान उर्फ गोलू (33 वर्ष), निवासी लखीमपुर खीरी को गिरफ्तार किया है। दोनों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति खुद को आईपीएस, सीबीआई, सुप्रीम कोर्ट या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर फोन करे तो उसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना कोई भी रकम ट्रांसफर न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर सूचना दें।
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