Jabalpur News: जज को फोन करने के मामले में विधायक संजय पाठक ने मांगी बिना शर्त माफी, हाईकोर्ट ने 21 अप्रैल को किया तलब

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। मध्यप्रदेश के चर्चित कंटेंप्ट केस में सोमवार, 6 अप्रैल को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिविजन बेंच में अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की पीठ के समक्ष हुई, जिसमें भाजपा विधायक संजय पाठक ने कोर्ट में हलफनामा पेश कर बिना शर्त माफी मांगी।

हलफनामे में दो बार मांगी माफी

विधायक संजय पाठक ने अपने हलफनामे में स्पष्ट रूप से कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार से न्यायालय की अवमानना करना नहीं था। उन्होंने दो बार यह दोहराया कि वे कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगते हैं और भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी।

“गलती से लग गया कॉल”, बाद में भेजा मैसेज

सुनवाई के दौरान संजय पाठक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जज का नंबर गलती से डायल हो गया था और तुरंत कॉल काट दिया गया।

हालांकि, बाद में एक मैसेज भेजा गया—“I AM SANJAY PATHAKI”—जिसका उद्देश्य सिर्फ यह बताना था कि मिस कॉल किसकी ओर से गया था, न कि किसी प्रकार का दबाव बनाना।

राजनीतिक साजिश का भी आरोप

संजय पाठक की ओर से यह भी कहा गया कि जिस माइनिंग केस की सुनवाई चल रही थी, वह सीधे तौर पर उनके खिलाफ नहीं बल्कि उनके परिवार से जुड़ा था। साथ ही आरोप लगाया गया कि उनके खिलाफ दायर याचिकाएं राजनीतिक विरोधियों द्वारा उनकी छवि खराब करने के लिए प्रेरित हैं।

इस संदर्भ में दिग्विजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का भी जिक्र रहा, जिसमें उन्होंने संजय पाठक पर गंभीर सवाल उठाए थे।

गलत मंशा से किया इंकार

अधिवक्ता ने अवमानना कानून की धारा 12 का हवाला देते हुए कहा कि कंटेंप्ट तभी बनता है जब जानबूझकर अदालत की अवमानना की जाए। इस मामले में ऐसी कोई मंशा नहीं थी और माफी पहले ही मांगी जा चुकी है।

हाईकोर्ट सख्त, खुद पेश होने के निर्देश

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संजय पाठक को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अब उन्हें 21 अप्रैल 2026 को जबलपुर स्थित हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच के सामने पेश होना होगा।

क्या है पूरा विवाद?

पूरा मामला एक माइनिंग केस की सुनवाई के दौरान शुरू हुआ, जिसकी सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट में चल रही थी। आरोप है कि संजय पाठक ने इस केस के संबंध में जज को फोन कर चर्चा करने की कोशिश की।

इस घटना को गंभीर मानते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को मामले से अलग कर लिया और पूरी जानकारी ऑर्डर शीट में दर्ज कर केस चीफ जस्टिस को सौंप दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने इसे न्यायालय की अवमानना मानते हुए संजय पाठक के खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट केस दर्ज करने का आदेश दिया।

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