दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। दतिया से कांग्रेस विधायक Rajendra Bharti को दिल्ली की MP-MLA कोर्ट ने भूमि विकास बैंक घोटाले के मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें IPC की धारा 420 के तहत दोषी मानते हुए तिहाड़ जेल भेज दिया। मामला बैंक एफडी में कथित फर्जीवाड़े और दस्तावेजों में छेड़छाड़ से जुड़ा है।
मां के नाम एफडी कराकर बढ़वाई अवधि
आरोप है कि वर्ष 1998 में जब Rajendra Bharti जिला सहकारी कृषि ग्रामीण बैंक दतिया के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने अपनी मां सावित्री देवी के नाम 10.50 लाख रुपए की एफडी कराई थी। यह एफडी तीन साल के लिए थी, जिस पर 13.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिल रहा था।
बाद में एफडी की अवधि कागजों में बदलाव कर पहले तीन साल और फिर करीब 10 साल तक बढ़ा दी गई। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने नियमों के विरुद्ध हर साल ब्याज भी निकलवाया, जबकि नियमानुसार ब्याज और मूलधन मैच्योरिटी के बाद मिलना चाहिए था।
बैंक कर्मचारी की शिकायत के बाद खुला मामला
इस पूरे मामले का खुलासा बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह की शिकायत के बाद हुआ। बैंक प्रबंधन को वर्ष 2003 में गड़बड़ी की जानकारी मिली, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू हुई। जांच में दस्तावेजों में छेड़छाड़, फर्जी रिकॉर्ड और पद के दुरुपयोग के आरोप सामने आए।
इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम, दतिया सीजेएम कोर्ट, ग्वालियर MP-MLA कोर्ट और अंततः दिल्ली की स्पेशल MP-MLA कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश से जुड़ी धाराओं में सुनवाई की।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
Rajendra Bharti ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन उन्हें कहीं से राहत नहीं मिली। बाद में निष्पक्ष सुनवाई की मांग पर मामला दिल्ली ट्रांसफर किया गया।
करीब 25 साल पुराने इस मामले में अब कोर्ट ने दोष सिद्ध माना है, जिसके बाद विधायक की सदस्यता और हाल ही में उन्हें विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बुधवार को ही मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष Narendra Singh Tomar ने वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया था। इसमें Rajendra Bharti को सदस्य सुविधा समिति का सदस्य बनाया गया था। समिति की अध्यक्षता Shailendra Jain को सौंपी गई है।
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