दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। संस्कारधानी में गर्मी का पारा चढ़ते ही ठंडे पानी की मांग बढ़ गई है, लेकिन इसी के साथ मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक ऐसी फैक्ट्री पर छापा मारा है, जहां बिना किसी प्यूरीफिकेशन सिस्टम के सीधे बोरवेल के पानी को पाउच में भरकर बाजार में बेचा जा रहा था। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को सील कर दिया है और संचालक के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सील होने के बावजूद दोबारा शुरू किया खेल
खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेन्द्र कुमार ने बताया कि सिहोरा स्थित इस फैक्ट्री के पास न तो फूड लाइसेंस था और न ही पानी की शुद्धता जांचने का कोई प्रमाण। लगभग दो महीने पहले भी इस फैक्ट्री पर कार्रवाई कर इसे बंद कराया गया था। लेकिन, संचालक की दबंगई देखिए कि उसने प्रशासन की सील की परवाह न करते हुए दोबारा उसी गंदे बोरवेल के पानी को पैक करना शुरू कर दिया।
जब टीम दोबारा निरीक्षण पर पहुंची, तो वहां धड़ल्ले से पानी भरा जा रहा था। विभाग ने मौके से सैकड़ों पानी के पाउच और अवैध रूप से संचालित मशीनरी को जब्त कर लिया है।
शादी-ब्याह, सामाजिक कार्यक्रमों और शराब की दुकानों पर इन पानी पाउच की सबसे ज्यादा खपत होती है। लोग इन्हें साफ और सुरक्षित समझकर खरीदते हैं, लेकिन हकीकत में यह 'स्लो पॉइजन' (धीमा जहर) साबित हो सकता है। बिना फिल्टर किए गए बोरवेल के पानी से टाइफाइड, पीलिया और पेट की गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है।सावधानी बरतें: कैसे पहचानें मिलावटी पानी?
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पानी का पाउच या बोतल खरीदते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें:
IS No. और FSSAI नंबर: हमेशा चेक करें कि पाउच पर ISI मार्क और खाद्य विभाग का लाइसेंस नंबर दर्ज है या नहीं।
पैकेजिंग की क्वालिटी: अगर पाउच की प्रिंटिंग खराब है या पानी का रंग धुंधला दिख रहा है, तो उसे कतई न लें।
स्वाद: पानी का स्वाद थोड़ा भी कड़वा या अजीब लगने पर उसे तुरंत फेंक दें।
दोषी पर होगी कड़ी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। फैक्ट्री को सील करने के साथ ही संचालक के विरुद्ध एफआईआर (FIR) की तैयारी की जा रही है ताकि जिले के अन्य मिलावटखोरों को सख्त संदेश मिल सके।

