दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। बरगी में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य सरकार द्वारा गठित जस्टिस संजय दिवेदी आयोग के समक्ष शिकायतकर्ताओं ने अपने बयान दर्ज कराते हुए कई नए सवाल और गंभीर आपत्तियां उठाई हैं। इनमें हादसे के बाद क्रूज और उसके इंजन की कथित रूप से जांच के बिना हटाए जाने, तकनीकी जांच की कमी तथा आपदा प्रबंधन व्यवस्था में संभावित लापरवाही जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं।
यह हादसा 30 अप्रैल को हुआ था, जिसमें चार बच्चों सहित कुल 13 पर्यटकों की मौत हो गई थी। घटना के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन किया था, जो अब अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शिकायतकर्ताओं सामाजिक कार्यकर्ता नीरज मिश्रा, अखिलेश त्रिपाठी और डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने आयोग के समक्ष कहा कि हादसे के बाद क्रूज के बचे हुए हिस्सों और उसके इंजन की स्वतंत्र तकनीकी जांच नहीं कराई गई, जो एक गंभीर चूक है।
उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर बड़े हादसों के बाद तकनीकी फॉरेंसिक जांच की जाती है, जिससे दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चलता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया कि दुर्घटना के बाद क्रूज के क्षतिग्रस्त हिस्सों और इंजन को हटाने या तोड़ने की प्रक्रिया किस आधार पर की गई।
शिकायतकर्ताओं ने आयोग से मांग की है कि हादसे के दौरान जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से उस समय जिम्मेदारी संभाल रहे कलेक्टर के बयान दर्ज करने की मांग की है।
अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत जिला कलेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका और उपलब्ध व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है।
डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने आयोग के समक्ष कहा कि बरगी बांध क्षेत्र में क्रूज संचालन से जुड़े तकनीकी दस्तावेज, फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट की भी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्रूज का मेंटेनेंस किस शिपिंग यार्ड में और किन मानकों के तहत किया जाता था।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि सभी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की स्वतंत्र जांच की जाए तो हादसे के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकती है।
नीरज मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के समय मौके पर पहुंची एंबुलेंस में पर्याप्त मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर मौजूद नहीं थे, जिससे राहत कार्य प्रभावित हुआ। उन्होंने आपदा प्रबंधन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए।
जस्टिस संजय दिवेदी ने बताया कि अधिकांश प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और शेष प्रक्रिया पूरी होते ही जांच रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी। आयोग ने घटनास्थल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण भी किया है।
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