बंगाल में बड़ा सियासी भूचाल: ममता को बड़ा झटका! बागी विधायकों ने खोला मोर्चा, विधानसभा अध्यक्ष के सामने चुनाव चिह्न और नेता प्रतिपक्ष पद पर ठोंका दावा

दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो गुटों में बंटने के आसार नजर आ रहे हैं। पार्टी से निष्कासित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि विधानसभा के कुल 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक एकजुट होकर खुद को 'असली तृणमूल' घोषित करने की तैयारी में हैं। बागी गुट के ये सभी विधायक आज विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मुलाकात कर तीन प्रमुख मांगें रखने वाले हैं। इनमें पहला दावा खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताने का है, दूसरा शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने और तीसरा दो-तिहाई बहुमत के आधार पर पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना हक जताने का है। हालांकि, दलबदल कानून के तहत विधानसभा में नए गुट को मान्यता पाने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 54 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी, जिससे कम संख्या होने पर स्पीकर इसे खारिज कर सकते हैं।

इस संभावित टूट की नींव सोमवार को उस वक्त मजबूत हुई जब पार्टी से निकाले गए दो विधायकों—संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने कोलकाता के एमएलए हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों के साथ एक गुप्त बैठक की, जिसमें ममता बनर्जी के कुछ बेहद करीबी चेहरे भी शामिल हुए। दरअसल, इन दोनों विधायकों को ममता बनर्जी ने सोमवार को ही पार्टी से निष्कासित किया था। दोनों ने स्पीकर से लिखित शिकायत की थी कि शोभनदेव को नेता प्रतिपक्ष बनाने वाले प्रस्ताव पत्र पर पार्टी ने उनके फर्जी हस्ताक्षर (साइन) किए हैं, और इसी शिकायत के बाद उन पर यह कार्रवाई की गई। टीएमसी के भीतर यह नाराजगी पिछले 12 दिनों के घटनाक्रमों से साफ दिखाई दे रही थी, जब 31 मई को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में 80 में से 60 विधायक गायब रहे थे और उससे पहले 20 मई के एक पार्टी कार्यक्रम में भी सिर्फ 35 विधायक ही पहुंचे थे। इसके अलावा, सांसद काकोली घोष का इस्तीफा और शीर्ष नेताओं अभिषेक बनर्जी व कल्याण बनर्जी पर हुए हालिया हमलों ने भी अंदरूनी असंतोष को बढ़ाने का काम किया है।

इस पूरे सियासी ड्रामे पर राज्य के अन्य दलों ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ किया कि भाजपा के दरवाजे टीएमसी के नेताओं के लिए पूरी तरह बंद हैं और वे किसी दागी चेहरे को शामिल कर पार्टी का 'तृणमूलीकरण' नहीं करेंगे। वहीं, कांग्रेस नेता उदित राज ने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी जो बो रही हैं, वही काट रही हैं और अब टीएमसी का अस्तित्व बचना मुश्किल लग रहा है। दूसरी ओर, टीएमसी नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दावा किया है कि तमाम अटकलों के बावजूद अधिकांश विधायक ममता बनर्जी के साथ ही बने रहेंगे। कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि बागी गुट 54 विधायकों का आंकड़ा जुटा भी लेता है, तो भी पार्टी नाम और चुनाव चिह्न पाने के लिए सिर्फ विधानसभा की संख्या काफी नहीं होगी। निर्वाचन आयोग और देश के संवैधानिक नियमों के अनुसार, इसके लिए लोकसभा सांसदों (28 में से 19 सांसद), राष्ट्रीय कार्यकारिणी और जमीनी संगठन के बहुमत को भी साबित करना होगा, अन्यथा बागी गुट को एक नया दल बनाने पर मजबूर होना पड़ेगा। 

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