Jabalpur News: सफाई कर्मचारी से 'करोड़पति' बनने तक का सफर, नगर निगम के पोलाराव पर EOW का शिकंजा, ₹1.19 करोड़ के नकद लेनदेन के दस्तावेज जब्त

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने नगर निगम जबलपुर के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोलाराव के निवास एवं कार्यालय पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापामार कार्रवाई करते हुए करीब 2.82 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच में मिली संपत्तियों और निवेशों को देखते हुए ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार ईओडब्ल्यू को पोलाराव के विरुद्ध भ्रष्टाचार के माध्यम से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के सत्यापन में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर मंगलवार सुबह करीब छह बजे ईओडब्ल्यू की तीन टीमों ने विजय नगर स्थित उनके निवास और कार्यालय पर एक साथ कार्रवाई की।

जांच के दौरान पोलाराव और उनके परिजनों के नाम पर लगभग 45 लाख रुपये का फ्लैट, 65 लाख रुपये का भूखंड, 16 लाख रुपये का घरेलू सामान, 10 लाख रुपये की बीमा पॉलिसियां, 150 ग्राम सोने के आभूषण, 232 किलोग्राम चांदी के आभूषण, एक चार पहिया वाहन और तीन दोपहिया वाहन होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा छह बैंक खातों में करीब 10 लाख रुपये जमा पाए गए हैं तथा बैंकों में लगभग 450 ग्राम सोना जमा होने की संभावना भी जताई गई है।

ईओडब्ल्यू अधिकारियों ने तलाशी के दौरान 1.19 करोड़ रुपये के नकद लेनदेन से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों की जांच जारी है तथा कार्रवाई पूरी होने के बाद संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

पोलाराव वर्तमान में नगर निगम के 16 जोनों में से पांच जोनों की सफाई व्यवस्था और स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रभार संभाल रहे हैं। इनमें दमोहनाका, भानतलैया, लालमाटी, रांझी और गोकुलदास धर्मशाला क्षेत्र शामिल हैं।

बताया जाता है कि पोलाराव की नियुक्ति वर्ष 1996 में नगर निगम में सफाई कर्मचारी के रूप में हुई थी। इसके बाद वे सफाई सुपरवाइजर बने और वर्ष 2016 में मुख्य स्वच्छता निरीक्षक की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2023-24 में उन्हें प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी का दायित्व सौंपा गया था।

ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार दस्तावेजों, बैंक खातों, आभूषणों और अन्य निवेशों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कुल संपत्ति कितनी है और वह उनकी ज्ञात आय के अनुपात में कितनी अधिक है। इधर ईओडब्ल्यू की कार्रवाई के बाद नगर निगम में भी हड़कंप का माहौल बना हुआ है।

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