दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को टीम ने सात पेन ड्राइव में सुरक्षित किया है। छह दिनों की पड़ताल में करीब 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से 25 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों से SIT पूछताछ कर चुकी है, उन्हें अगले आदेश तक अयोध्या छोड़कर कहीं नहीं जाने की चेतावनी दी गई है। इनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का नाम भी शामिल है।
जांच टीम ने छह दिनों तक मंदिर प्रशासन, बैंक अधिकारियों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की। इस दौरान सीसीटीवी फुटेज, दान राशि की गिनती की प्रक्रिया, बैंक में धन जमा करने की व्यवस्था और वित्तीय दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। टीम ने संदिग्धों के बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई है।
अब तक दो करोड़ रुपये की बरामदगी
चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर अब तक लगभग दो करोड़ रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। जांच के दौरान टिन्नू यादव के घर से सोना भी मिलने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इसकी मात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
प्रबंधन पर उठे सवाल
जांच में मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई और पदों से हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
नृपेंद्र मिश्रा ने जताई नाराजगी
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे पर डाका डाला गया है। उन्होंने मंदिर प्रबंधन में व्यापक बदलाव और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई। साथ ही कहा कि दान राशि की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती गई है।
CEO नियुक्ति पर भी मंथन
सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अयोध्या राम मंदिर में काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
सियासी घमासान भी तेज
मामले को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सपा नेताओं ने करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी का आरोप लगाया है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल प्रदेश की निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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