Jabalpur News: जबलपुर की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव, लोकसभा सीट दो हिस्सों में बंटने का प्रस्ताव; अधारताल और गोसलपुर नई विधानसभा बनने की चर्चा

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। भविष्य में होने वाले लोकसभा परिसीमन (Delimitation) को लेकर जबलपुर की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में मध्य प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। प्रस्तावित मॉडल के अनुसार जबलपुर लोकसभा क्षेत्र को भी दो हिस्सों—जबलपुर शहर और जबलपुर ग्रामीण—में विभाजित किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो न केवल संसदीय क्षेत्र की सीमाएं बदलेंगी, बल्कि विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन की संभावनाएं भी मजबूत हो जाएंगी।

जयपुर मॉडल पर बन सकता है जबलपुर का नया स्वरूप

राजस्थान में वर्तमान में जयपुर शहर और जयपुर ग्रामीण दो अलग-अलग लोकसभा सीटें हैं। इसी तरह का मॉडल जबलपुर में भी लागू होने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में जबलपुर लोकसभा क्षेत्र में शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्र शामिल हैं, लेकिन बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और मतदाताओं की संख्या को देखते हुए इसे दो संसदीय क्षेत्रों में विभाजित करने का सुझाव दिया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जबलपुर शहर लोकसभा में नगर निगम क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्र—जबलपुर उत्तर, जबलपुर पूर्व, जबलपुर पश्चिम, जबलपुर कैंट और जबलपुर मध्य—शामिल हो सकते हैं, जबकि जबलपुर ग्रामीण लोकसभा में पाटन, पनागर, बरगी और सिहोरा विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम स्वरूप परिसीमन आयोग द्वारा तय किया जाएगा।

नई विधानसभा सीटों की भी चर्चा

लोकसभा परिसीमन के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार को देखते हुए अधारताल को नई शहरी विधानसभा तथा गोसलपुर को नई ग्रामीण विधानसभा के रूप में बनाया जा सकता है।

हालांकि इस संबंध में चुनाव आयोग, परिसीमन आयोग या केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसे फिलहाल केवल संभावित राजनीतिक संभावना के रूप में देखा जा रहा है।

मतदाताओं की संख्या बता रही बदलाव की जरूरत

2023 के विधानसभा चुनाव में जबलपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या इस प्रकार रही—

* पाटन – 2,08,863
* पनागर – 2,07,707
* बरगी – 1,97,803
* सिहोरा – 1,81,523
* जबलपुर पूर्व – 1,72,866
* जबलपुर पश्चिम – 1,66,503
* जबलपुर उत्तर – 1,57,637
* जबलपुर कैंट – 1,29,127

इन आठ विधानसभा क्षेत्रों में कुल मिलाकर लगभग 14.22 लाख मतदाता दर्ज किए गए थे। सामान्यतः एक मतदाता सूची के आधार पर कुल आबादी इससे लगभग दोगुनी या उससे अधिक होती है। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्तमान में जबलपुर लोकसभा क्षेत्र की आबादी करीब 22 से 25 लाख के बीच पहुंच चुकी है। हालांकि वास्तविक और आधिकारिक जनसंख्या का आंकड़ा अगली जनगणना के बाद ही सामने आएगा।

राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं

यदि जबलपुर लोकसभा सीट दो हिस्सों में विभाजित होती है तो शहर और ग्रामीण क्षेत्र की राजनीति अलग-अलग दिशा में विकसित हो सकती है। शहरी क्षेत्र के मुद्दे, जैसे ट्रैफिक, स्मार्ट सिटी, उद्योग, रोजगार और आधारभूत सुविधाएं प्रमुख रहेंगे, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई, कृषि, सड़क, पेयजल और पंचायत विकास जैसे मुद्दे अधिक प्रभावी होंगे।

राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति बदलनी होगी। अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों के कारण स्थानीय नेतृत्व को अधिक अवसर मिलेंगे और चुनावी समीकरण नए सिरे से बनेंगे।

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