दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल/दतिया। निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही दतिया क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, उपचुनाव की अधिसूचना 6 जुलाई को जारी होगी। इसके बाद 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई को होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 16 जुलाई निर्धारित की गई है। इसके बाद 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा और 3 अगस्त को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। निर्वाचन की यह पूरी प्रक्रिया 4 अगस्त तक संपन्न कर ली जाएगी। सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट के माध्यम से वोटिंग होगी।
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के कारण आई है। राजेंद्र भारती को 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने 28 साल पुराने (वर्ष 1998) सहकारी बैंक एफडी फर्जीवाड़े के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद 2 अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें 3 वर्ष के कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'लिली थॉमस' फैसले के तहत यदि किसी मौजूदा विधायक को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। इसी नियम के तहत मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने 2 अप्रैल 2026 से ही राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द कर दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया था।
इस उपचुनाव में दतिया का सियासी रण बेहद दिलचस्प होने वाला है, जहाँ मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं। साल 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में करीब 7,742 वोटों से हार का सामना करने वाले पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का इस उपचुनाव में भाजपा की ओर से लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। पिछली हार से सबक लेते हुए मिश्रा पिछले दो महीनों में एक दर्जन से अधिक सामाजिक सम्मेलन कर चुके हैं और डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस में टिकट को लेकर खींचतान की स्थिति है। विधायक पद गंवा चुके राजेंद्र भारती अब इस सीट से अपने बेटे अनुज भारती को टिकट दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं, भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक और पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी टिकट की दावेदारी ठोक रहे हैं। इन दोनों दलों के अलावा, आजाद समाज पार्टी (ASP) ने इस सीट से दामोदर यादव को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जो लगातार किसान सम्मेलनों के जरिए क्षेत्र में पैठ बना रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, इस उपचुनाव में स्थानीय विकास कार्यों या मुद्दों से ज्यादा जातिगत गणित निर्णायक भूमिका निभाएगा। दतिया में सबसे बड़ी ताकत कुशवाहा समाज है, जिसके करीब 37 हजार मतदाता हैं। यदि चुनावी मैदान में इस समाज का कोई निर्दलीय या अन्य उम्मीदवार आता है, तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है। वहीं, करीब 35 हजार मतदाताओं वाले ब्राह्मण वर्ग का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक तौर पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा के साथ मजबूती से खड़ा नजर आता है। क्षेत्र के 18 हजार यादव मतदाताओं ने पिछले चुनाव में भाजपा का साथ नहीं दिया था, लेकिन इस बार दामोदर यादव (ASP) के मैदान में होने से यादव वोटों में बिखराव तय है, जो मुख्य रूप से कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाएगा और विपक्षी दल की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
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