दैनिक सांध्य बन्धु (एजेंसी) भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे आगामी उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि अभी तक भाजपा, कांग्रेस या आजाद समाज पार्टी (आसपा) में से किसी ने भी अपने आधिकारिक प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन चुनावी जंग सड़कों और गलियों तक उतर चुकी है। जहां भाजपा के दिग्गज नेता जनसभाएं कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाले हुए है और आजाद समाज पार्टी पहले ही 70 फीसदी क्षेत्र कवर करने का दावा कर रही है।
भाजपा की ओर से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्होंने पार्टी की आधिकारिक घोषणा से पहले ही नामांकन फॉर्म खरीद लिया है और अब तक दो बड़ी चुनावी सभाएं भी कर चुके हैं। पहली सभा में उन्होंने भावुक कार्ड खेलते हुए जनता से पुरानी गलतियों के लिए क्षमा मांगी और कहा कि अब अगर कोई उनके घर आएगा, तो वे खुद खड़े होकर उसे ससम्मान बैठाएंगे। वहीं दूसरी सभा में उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए 70 करोड़ रुपये की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर पलटवार किया और कहा कि भाजपा 'रद्दी माल' नहीं खरीदती। भाजपा में नरोत्तम मिश्रा के अलावा आरएसएस के पूर्व प्रचारक अनूप यादव और वरिष्ठ नेता अशोक सिजरिया का नाम भी चर्चा में बना हुआ है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस में टिकट को लेकर मथानी जारी है। यहाँ पिछले चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को पटखनी देने वाले राजेंद्र भारती की पत्नी शोभा भारती का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसके अलावा दतिया राजघराने के मुखिया और वरिष्ठ नेता कु. घनश्याम सिंह तथा दो बार चुनावी मैदान में उतर चुके अवधेश नायक भी रेस में मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी की रणनीति को लेकर जिला कांग्रेस संगठन महासचिव नरेंद्र गुर्जर ने बताया कि कांग्रेस बड़ी सभाओं के बजाय सीधे मतदाताओं के घर पहुंच रही है। पार्टी का 'डोर-टू-डोर' (घर-घर) जनसंपर्क अभियान जोरों पर है और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
इस त्रिकोणीय मुकाबले में आजाद समाज पार्टी (आसपा) भी बेहद मजबूत तैयारी के साथ उतरी है। पार्टी के नेता दामोदर यादव का कहना है कि जब पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हुई थी, उन्होंने तभी से अपनी चुनावी जमीन तैयार करना शुरू कर दिया था। आसपा का मुख्य फोकस ग्रामीण इलाकों पर है और उनके कार्यकर्ता विधानसभा के करीब 70 प्रतिशत गांवों में जनसंपर्क पूरा कर चुके हैं। दतिया का यह उपचुनाव बिना प्रत्याशियों के भी पूरी तरह रंग में आ चुका है, जिसने आगामी मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
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