Jabalpur News: बाइकों से फूट रहे पटाखे, जनता परेशान; आखिर कब कसा जाएगा मॉडिफाइड साइलेंसर पर शिकंजा?

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। शहर में मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों का बढ़ता चलन अब आम लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता जा रहा है। प्रमुख सड़कों से लेकर कॉलोनियों तक बड़ी संख्या में युवा अपनी बाइकों के साइलेंसर में बदलाव कर तेज आवाज के साथ वाहन दौड़ा रहे हैं। कई स्थानों पर बाइक के साइलेंसर से पटाखों जैसी आवाजें निकालकर स्टंटबाजी की जा रही है, जिससे राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

मफलर हटाकर बढ़ाई जा रही आवाज

जानकारी के अनुसार शहर में कई बाइक चालक बुलेट, पल्सर सहित अन्य 125 सीसी और उससे अधिक क्षमता वाली बाइकों के साइलेंसर से मफलर हटवाकर या उनमें बदलाव कर अत्यधिक शोर पैदा कर रहे हैं। यह शोर सामान्य मानकों से कहीं अधिक होता है और कई बार पटाखे जैसी आवाज भी सुनाई देती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे वाहन चालक भीड़भाड़ वाले बाजारों, कॉलोनियों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के आसपास भी तेज आवाज में बाइक चलाते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोग अचानक घबरा जाते हैं।

बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही परेशानी

तेज आवाज वाली इन बाइकों के गुजरने पर छोटे बच्चे डर जाते हैं, जबकि बुजुर्ग और महिलाएं भी अचानक तेज धमाके जैसी आवाज से असहज हो जाती हैं। कई बार सड़क पार करते समय लोग घबराकर संतुलन भी खो देते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

नागरिकों का कहना है कि कई युवक जानबूझकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में बाइक की रफ्तार बढ़ाकर और एक्सीलेटर देकर पटाखे जैसी आवाज निकालते हैं, जिसे वे मनोरंजन समझते हैं, लेकिन इससे अन्य लोगों को भारी परेशानी होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार इंसानी कानों के लिए लगभग 80 डेसीबल तक की ध्वनि सुरक्षित मानी जाती है, जबकि मॉडिफाइड साइलेंसर वाली कई बाइकों से 125 डेसीबल या उससे अधिक आवाज उत्पन्न होती है।

चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा तेज ध्वनि से शरीर में कॉर्टिसोल, एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे तनाव संबंधी हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, अनिद्रा, थकान, हृदय गति में अनियमितता, दिल का दौरा और हृदय संबंधी अन्य गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

बिना अनुमति हो रहा साइलेंसर में बदलाव

शहर में कई दोपहिया वाहन मरम्मत केंद्रों पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के बाइकों के साइलेंसर में बदलाव किए जाने की बात भी सामने आ रही है। वाहन मैकेनिक साइलेंसर के मफलर हटाकर या अन्य संशोधन कर उसकी आवाज बढ़ा रहे हैं, जिससे वाहन निर्धारित ध्वनि मानकों का उल्लंघन करने लगते हैं।

कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों पर वाहन जांच अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन मॉडिफाइड साइलेंसर वाली कई बाइकें कार्रवाई से बच निकलती हैं। लोगों ने मांग की है कि शहर में विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की पहचान की जाए, मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त किए जाएं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक शांति का भी सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि मॉडिफाइड साइलेंसर केवल ध्वनि प्रदूषण का ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा का भी मुद्दा है। तेज आवाज और स्टंटबाजी से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है तथा सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा और शांति प्रभावित होती है। ऐसे में नियमों का सख्ती से पालन कराना और जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

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