Jabalpur News: भाजयुमो अध्यक्ष की दौड़ तेज, जातीय संतुलन या नया चेहरा, किसके सिर सजेगा ताज...?

दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) जबलपुर शहर के नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जिले की सियासी सरगर्मियां एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं। भाजपा संगठन के भीतर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और संभावित दावेदारों ने शीर्ष नेताओं के सामने अपनी लॉबिंग तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन 25 जुलाई तक पहली सूची जारी कर सकता है, जिसमें छोटे जिलों के साथ जबलपुर ग्रामीण युवा मोर्चा के अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है, जबकि अगस्त के पहले सप्ताह तक जबलपुर शहर को नया युवा सेनापति मिलने की उम्मीद है।

फरवरी से ही तेज हो गई थी सियासी हलचल

दरअसल, फरवरी में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के जबलपुर दौरे के दौरान अध्यक्ष पद की दौड़ खुलकर सामने आ गई थी। शहरभर में लगे बैनर, पोस्टर, समर्थकों की भीड़ और नेताओं की सक्रिय मौजूदगी ने साफ संकेत दे दिए थे कि कई युवा नेता इस पद की दावेदारी कर रहे हैं। उस समय से ही संगठन के भीतर लगातार समीकरण वन और बिगड़ रहे हैं।

दतिया उपचुनाव के बाद बदली रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में दतिया उपचुनाव के दौरान पैदा हुए हालातों के बाद भाजपा संगठन अब नियुक्तियों को लेकर बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। पहले जहाँ यह माना जा रहा था कि जबलपुर शहर की कमान पूरी तरह किसी कद्दावर नेता या कैबिनेट मंत्री की पसंद पर तय होगी, वहीं अब भाजपा गॉडफादर संस्कृति से इतर संगठन के प्रति समर्पित, अनुशासित और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता को प्राथमिकता देने के पक्ष में है।

ग्रामीण और शहर की नियुक्तियों में फंसा जातीय समीकरण

भाजपा इस बार संगठनात्मक सक्रियता के साथ-साथ सामाजिक और जातीय संतुलन को भी साधने की कवायद में है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार यदि जबलपुर ग्रामीण की कमान ब्राह्मण समाज से आने वाले पंकज तिवारी को मिलती है, तो शहर अध्यक्ष पद पर किसी अन्य वर्ग के चेहरे को मौका दिया जा सकता है। वहीं, यदि ग्रामीण क्षेत्र में ओबीसी समाज के अंचल साहू को जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो शहर में बारमण समाज से आने वाले किसी युवा नेता का दावा सबसे मजबूत हो जाएगा। इससे पहले भी जब भाजपा ने ग्रामीण अध्यक्ष के रूप में राजकुमार पटेल को चुना था, तो शहर में सारे समीकरणों को बदलते हुए अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले स्वेश सोनकर को नगर अध्यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया था। इसी कारण इस बार भी नेताओं की आवाजाही संघ कार्यालय केशव कुटी में बढ़ गई है।

ये हैं अध्यक्ष पद की दौड़ के प्रमुख दावेदार

रौनक अग्रवाल -वर्तमान में युवा मोर्चा के महामंत्री हैं। संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं और कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह के करीबी माने जाते हैं। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ बताई जाती है।

शुभम अरिहंत - वर्तमान उपाध्यक्ष हैं और संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इन्हें भी राकेश सिंह का करीबी माना जाता है। युवा कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पहचान रखते हैं।

ईशांत (ईशान) नायक - वर्तमान महामंत्री हैं। राजनीतिक हलकों में उन्हें सांसद आशीष दुबे का करीबी माना जाता है। संगठनात्मक गतिविधियों में लगातार सक्रिय रहने के कारण उनका नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है।

रविंद्र तिवारी - वर्तमान में युवा मोर्चा में मंत्री हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर के करीबी माने जाते हैं। संगठन में उनकी सक्रियता और नगर स्तर पर पकड़ को भी मजबूत माना जा रहा है।

क्या कोई नया चेहरा चौंकाएगा?

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सिर्फ इन पाँच चर्चित नामों के भरोसे फैसला नहीं होगा। आगामी नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीतिक तैयारी को देखते हुए भाजपा नेतृत्व किसी ऐसे सक्रिय कार्यकर्ता या नए चेहरे पर भी दांव खेल सकता है, जिसने अब तक किसी बड़े पद पर काम न किया हो लेकिन युवाओं को एकजुट करने की क्षमता रखता हो।

इन बिंदुओं पर मंथन कर रहा है संगठन

1. संगठनात्मक सक्रियता और जमीनी पकड़।
2. वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल।
3. आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक क्षमता।
4. सभी सामाजिक वर्गों में स्वीकार्यता।
5. जातीय एवं सामाजिक संतुलन।
6. युवा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की क्षमता।
7. संगठन के प्रति समर्पण और अनुशासन।

अब सबकी निगाहें सूची पर

भाजपा संगठन के भीतर लगातार मंथन जारी है। ससंभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं और समर्थकों के जरिए माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा का प्रदेश नेतृत्व करेगा। भाजपा संगठन के भीतर लगातार मंथन जारी है। संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं और समर्थकों के माध्यम से माहौल बनाने में जुटे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा प्रदेश नेतृत्व और संगठन के शीर्ष स्तर पर ही लिया जाएगा। फिलहाल सबसे बड़ी निगाह 25 जुलाई को संभावित पहली सूची और उसके बाद जबलपुर ग्रामीण अध्यक्ष की नियुक्ति पर टिकी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ग्रामीण इकाई की घोषणा के बाद ही शहर अध्यक्ष के नाम पर तस्वीर साफ होगी। अब जबलपुर की राजनीतिक फिजाओं में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है-क्या भाजपा किसी अनुभवी और चर्चित चेहरे पर भरोसा जताएगी, या फिर संगठन की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अंतिम समय में किसी नए युवा चेहरे को मौका देकर सभी राजनीतिक समीकरण बदल देगी? इसका जवाब संभवतः अगस्त के पहले सप्ताह में सामने आ जाएगा

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