दैनिक सांध्य बन्धु जबलपुर। गोकलपुर स्थित बाल सुधार गृह में नाबालिगों से कथित वसूली, मारपीट और प्रतिबंधित सामान मिलने का मामला सामने आया है। हाल ही में जमानत पर बाहर आए 17 वर्षीय नाबालिग ने अपने पिता को बताया कि उससे हर सप्ताह 1 हजार रुपए मांगे जाते थे। रुपए नहीं देने पर उसके साथ मारपीट की गई और हाथों व शरीर के अन्य हिस्सों पर कट लगाए गए।
नाबालिग के पिता की शिकायत के बाद बाल सुधार गृह में सर्चिंग कराई गई। प्रबंधन के अनुसार, तलाशी में दो मोबाइल फोन, गांजा, गुटखा और अन्य प्रतिबंधित सामान मिला है।
1 हजार रुपए हर हफ्ते देने का आरोप
नाबालिग के पिता का आरोप है कि 12 अगस्त को बेटे ने फोन कर बताया था कि बाल सुधार गृह में करीब 10-12 लड़कों का एक समूह नए या कमजोर बच्चों पर दबाव बनाता है। कथित तौर पर उससे कहा गया कि सुरक्षित रहना है तो हर सप्ताह 1 हजार रुपए देने होंगे।
पिता के मुताबिक, पैसे नहीं देने के बाद बेटे के साथ मारपीट की गई। उसके दोनों हाथों पर कट के निशान मिले हैं। नाबालिग ने यह भी आरोप लगाया कि एक लड़के ने ब्लेड से उसके हाथ पर अपना नाम लिख दिया।
प्रबंधन ने कट की पुष्टि की
बाल सुधार गृह के अधीक्षक शैलेश कुमार और सहायक अधीक्षक अरुण कुमार बधोलिया ने एक बच्चे के साथ मारपीट और उसके हाथों पर कट लगाए जाने की पुष्टि की है। हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि कट ब्लेड से नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाई के लिए दिए जाने वाले शार्पनर की ब्लेड से लगाए गए थे।
प्रबंधन के मुताबिक, बच्चों को पेन, पेंसिल और शार्पनर जैसी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। घटना में इसी शार्पनर की ब्लेड के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
सर्चिंग में मोबाइल और प्रतिबंधित सामान मिला
शिकायत के बाद बाल सुधार गृह में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान दो मोबाइल फोन, गुटखा और अन्य प्रतिबंधित सामान मिलने की जानकारी दी गई। गांजा मिलने की बात भी सामने आई है।
अब जांच की जा रही है कि ये सामान बाल सुधार गृह के अंदर कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल कौन कर रहा था।
बाल न्यायालय को भेजी गई जानकारी
घटना के बाद बाल सुधार गृह प्रबंधन ने संबंधित बाल न्यायालय को पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है। रांझी थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी के मुताबिक, परिवार की शिकायत सुनी गई है और परिवार ने बाल सुधार गृह तथा कोर्ट में भी शिकायत की है। कोर्ट के निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, गोकलपुर बाल सुधार गृह में फिलहाल करीब 50 नाबालिग रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या 16 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों की है। मामले ने बाल सुधार गृह की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान पर कानून से संघर्ष की स्थिति में आए बच्चों को सुरक्षित और सुधारात्मक वातावरण देने की जिम्मेदारी है, वहां वसूली, मारपीट और प्रतिबंधित सामान मिलने के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना में कौन-कौन शामिल था और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कैसे हुई।
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